IMEC को ट्रंप का समर्थन, ईरान से जुड़े रास्तों से ऊर्जा ढांचा दूर करने की बात; बोले- वैकल्पिक मार्ग जरूरी

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे यानी IMEC को लेकर अमेरिकी समर्थन दोहराया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) और अरब देशों के नेताओं के साथ बैठक में ट्रंप ने कहा कि मध्य पूर्व के ऊर्जा ढांचे को ऐसे मार्गों से दूर करने की जरूरत है, जहां ईरान से जुड़े अवरोध पैदा हो सकते हैं।

वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों का किया जिक्र

ट्रंप ने क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों ने ऊर्जा और तेल परिवहन के लिए वैकल्पिक रास्तों की जरूरत को सामने ला दिया है।

उन्होंने कहा कि इसी वजह से उनका प्रशासन इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर और तेल को क्षेत्र से बाहर ले जाने वाली अन्य व्यवस्थाओं, जिसमें पाइपलाइन जैसे विकल्प भी शामिल हैं, का समर्थन करता है।

क्या है IMEC?

IMEC को 2023 में नई दिल्ली में हुए G20 शिखर सम्मेलन के दौरान पेश किया गया था। यह एक बहुपक्षीय कनेक्टिविटी परियोजना है, जिसका उद्देश्य भारत, खाड़ी क्षेत्र और यूरोप के बीच व्यापार एवं परिवहन संपर्क को विकसित करना है।

परियोजना में दो प्रमुख हिस्सों की परिकल्पना की गई है। ईस्टर्न कॉरिडोर भारत को खाड़ी क्षेत्र से जोड़ता है, जबकि नॉर्दर्न कॉरिडोर खाड़ी क्षेत्र को यूरोप से जोड़ने की दिशा में काम करता है। प्रस्तावित नेटवर्क में रेल और समुद्री-रेल परिवहन के साथ सड़क संपर्क भी शामिल हैं।

ईरान के संदर्भ में ट्रंप का बयान

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। उन्होंने ईरान से जुड़े ऊर्जा मार्गों को लेकर वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया।

बैठक के दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि क्षेत्र के देश लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों से निपटने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और मध्य पूर्व को अधिक सुरक्षित एवं समृद्ध बनाने के लिए सहयोग जरूरी है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है IMEC?

IMEC को भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक एवं लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी बढ़ाने वाली प्रस्तावित परियोजना के तौर पर देखा जाता है। इसके जरिए समुद्री और रेल मार्गों को एकीकृत कर माल परिवहन के लिए वैकल्पिक नेटवर्क विकसित करने की योजना है।

मौजूदा पश्चिम एशियाई तनाव के बीच ऊर्जा और व्यापार मार्गों की सुरक्षा का मुद्दा इस परियोजना की चर्चा में एक महत्वपूर्ण पहलू बन गया है। हालांकि, IMEC के वास्तविक प्रभाव और इसकी समयसीमा परियोजना से जुड़े देशों के बीच बुनियादी ढांचे, निवेश और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

Back to top button